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नवंबर 27, 2024

खुशबूदार यादें

      काश! ऐसा हो... कि जब अभी मैं यहाँ बैठी अपनी मन की मुराद डायरी के पन्ने के हवाले करने में लगी हूँ, कहीं कोई ज़हनी जादूगर ऐशी मशीन बनाने में लगा हो जिसमें हम अपनी "खुशबूदार यादें " सहेज सकें ।

. ऐसी खुशबू जिनको मन किसी सुंदर याद से नत्थी कर लेता है। मेरे पास तो एक बड़ा पिटारा है। ऐसे कोई खास खुशबू आई... और कोई खास-ही याद भी नुमायाँ हो गई। 
      अभी-अभी फिआमा डिविल्स बॉडीवॉश की खुशबू आते ही बरसों पुरानी कई यादों ने मन में परेड की एक बाद एक....
       यूनिवर्सिटी, पहला सेमेस्टर, जन्मशताब्दी महोत्सव, बर्फीली ठण्ड, कुछ गाने- "कोई दिल बेकाबू कर गया", महा मज़ेदार गाना "ऐ दिल ! दिल की दुनिया में"... मेरी दोस्त अन्नूरानी ❤️!! 
 वक्त में पीछे जाना तो बूते की बात नहीं लेकिन ये खुशबुएं जैसे कोई यान हैं जो मुझे वहां ले जाया करती हैं!!  

          एक दोपहर 

जब भी 'आलू का हलुआ' खाती हूँ, स्वाद से पहले याद आ जाती है बेहद आम-सी एक खास याद ! तो Inside Out फिल्म में होती हैं न - सुनहरी यादें.. उन्हीं की तरह ।  
जब पहली बार मैंने आलू का हलवा खाया था... महीने का आखिरी दिन था। मेरी स्कूल से जल्दी छुट्टी हो गई, थी और घर में एक नई-सी खुशबू घुली हुई थी इसके बाद जो याद है वो यही कि मम्मी किचन और आंगन के बीच के दरवाजे पर चटाई बिछाकर कोई उपन्यास पढ़ रही हैं... मैं  बैठी हलुए का लुत्फ उठा रही हूँ... बेहद अच्छी हवा चल रही है... कुछ और किताबें वहीं बिखरी हैं... मैं  रंग-बिरंगी आयताकार किताब 'घड़ियों की कहानी' पढ़ रही हूँ। दिल खुश है... जैसा किसी भी बच्चे का होना चाहिए.... वैसा अच्छा न जाने कब लगेगा !! 
                              मम्मी का पल्लू थामे, 
                              सारा दिन निकल जाता था । 
           वो बेवजह-सी खुशी बेहिसाब, 
           मन कहाँ से पाता था?