जीतना है?




उसने,
दे दिए हैं,
खूंखार पंजे,
शेर को और हिरण को- 
तेज़ी;
देख लें चारों ओर जो,
ऐसी माहिर आँखें!
यूँ,
छोड़ दिया है...
मैदान में
जहाँ,
नियम,रेफ़री तो,
नदारद हैं!
लेकिन नतीजा तय है-
जीतेगी शक्ति या स्फूर्ति;
या तीखे नाख़ून या मज़बूत टांगें नहीं !!
केवल,
माद्दा-जीवट-जुझारूपन....
फिर वो हो जिसमें भी!

-विशिष्टा ©