jalebian..!
जीवन की चाशनी से पगी हुईं ..कुरकुरी मज़ेदार..जलेबियाँ !!
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अंतर्यात्रा
जब जानोगे-
अपने भीतर प्रवाहित होते,
अथाह अब्धि को,
तब सुनोगे-
सिन्धु से प्रतिपल उठती,
सहस्र उर्मियों की अनुगूंज,
फिर पाओगे-
अम्बु-अंक में बिखरे,
अद्भुत माणिक्य,
हे मनुज!
तब होगी अनुभूति तुम्हें,
स्वयं के जलबिंदु होने की |
-विशिष्टा
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