एक दोपहर
जब भी 'आलू का हलुआ' खाती हूँ, स्वाद से पहले याद आ जाती है बेहद आम-सी एक खास याद ! तो Inside Out फिल्म में होती हैं न - सुनहरी यादें.. उन्हीं की तरह ।जब पहली बार मैंने आलू का हलवा खाया था... महीने का आखिरी दिन था। मेरी स्कूल से जल्दी छुट्टी हो गई, थी और घर में एक नई-सी खुशबू घुली हुई थी इसके बाद जो याद है वो यही कि मम्मी किचन और आंगन के बीच के दरवाजे पर चटाई बिछाकर कोई उपन्यास पढ़ रही हैं... मैं बैठी हलुए का लुत्फ उठा रही हूँ... बेहद अच्छी हवा चल रही है... कुछ और किताबें वहीं बिखरी हैं... मैं रंग-बिरंगी आयताकार किताब 'घड़ियों की कहानी' पढ़ रही हूँ। दिल खुश है... जैसा किसी भी बच्चे का होना चाहिए.... वैसा अच्छा न जाने कब लगेगा !!मम्मी का पल्लू थामे,सारा दिन निकल जाता था ।वो बेवजह-सी खुशी बेहिसाब,मन कहाँ से पाता था?