सितंबर 28, 2024

मासूम डर !

मैं मम्मी के साथ किसी के घर गई थी।
मेजबान -" गुड़िया चाय पीती है ना!"
(लगभग एक साथ) 
मैं- 'हाँ'
मम्मी-'नहीं ये चाय नहीं पीती'  
(कमरे में जानलेवा खामोशी)
मेजबान ने तुरंत अगली गेंद डाली -'बेटा कचौड़ी पसंद है आपको।' 
मैं - ' समोसे ज़्यादा पसंद हैं वैसे।' 
मम्मी ने आग्नेय आंखों से देख कान में कहा -'तू घर चल!' 
डर मेरी रूह में दौड़ गया। 
चाय आई... नाश्ता भी.. आंटी का मनुहार भी पर मुझसे कुछ खाया नहीं गया। चाय गटक ली। 
चाय के लिए "हां" करने के बाद से ले कर घर लौटने तक मम्मी के आगे एक भी गलती नहीं की। 
ना रास्ते में पड़े प्लास्टिक कप को लात मारके घर तक लाया गया। ना ही कुत्ते के बच्चे से खेला गया। मम्मी के घर के बाहर ही पड़ोसी आंटी से बात करने रुक जाने पर भी खुद दोस्तों संग खेलने भाग जाने का मौका भी कैश नहीं किया गया।घर आते ही चप्पल दो दिशा में नहीं फेंके गए।आते ही टीवी चालू करने का पाप तो दूर, उल्टा चुपचाप होमवर्क करने जैसी महानता का प्रदर्शन किया गया। घर की बेजान चीज़ें भी भौंचक्की थीं कि पचास रुपया काटो ओवरएक्टिंग का
          शाम जैसे तैसे कटी। रात के साथ पापा भी आए। बेल बजते ही किताब फेंक कर  दरवाज़ा खोलने भी नहीं दौड़ी।
मम्मी, जो अब तक अनदेखा कर रही थीं, ने हंसी को दबाए रखकर मुझे कड़ी आवाज़ में किचन में बुलाया। मम्मी लोग बड़ी गुणी होती हैं। ऐसी टोन में आपका नाम लेंगी कि आप समझ जाएंगे कि प्रसाद हाथ में मिलेगा कि गाल पर।     
      मार का डर नहीं था। अक्सर होता भी नहीं। डर होता है माँ के प्यार से हाथ धो बैठने का। माँ की रुखाई उनके चांटे से ज़्यादा दर्द देती है। मम्मी ये सोच ले कि मैं एक अच्छा बच्चा नहीं हूं और प्यार करना बन्द कर दे तो?
     ये सोचते हुए जब मैं किचन में पहुंची तो पाया कि मम्मी प्लेट में पापा के लाए समोसे निकाल रही थीं। मुझे टेढ़ी नज़र से देख बोलीं - ' इसके साथ चाय भी पियोगी?' 
मैं चुप! 
'ऐसे किसी के घर जाते हैं तो चटोरे नहीं बनते अच्छे बच्चे!' 
हँसकर कहा और थोड़ा दुलार दिया।
      ये हँसी, प्यार और समोसे की प्लेट ले कर मैं भागी,टीवी चलाया, रिमोट पर तेल सने हाथ लगाए, सोफा पर पानी छलकाया, तीखा खाने से निकले नाक आंख के पानी को आस्तीन से पोंछा, फिर समोसे के पेट से मसाला  निकाल पापा की प्लेट में पहाड़ बना दिया, मैदे का छिलका भकोसा, खाली प्लेट और अपने पैर टेबल पर रखे और नाक में उंगली डाल मोती बना बना कर सोफे के हत्थे पर रखने जा ही रही थी कि मम्मी ने आकर एक चपत लगाई।
   इस बार डर नहीं लगा। मम्मी की गोद में ही सिर रख थोड़ा सुबकी और सो गई।